प्रतियोगिताएं पांच-पांच राउंड में कराई गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा और भी रोमांचक बन गई. प्रत्येक राउंड में घुड़सवारों ने अपनी कला, संतुलन और घोड़ों की रफ्तार का बेहतरीन प्रदर्शन किया.
- मुख्य, “दो दांत”, घोड़ी और छकरी वर्ग में हुई रोमांचक प्रतिस्पर्धा
- पांच-पांच राउंड की दौड़ में दूर-दराज से आए प्रतिभागियों ने दिखाया दम
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ नगरी ब्रह्मपुर में आयोजित ऐतिहासिक फाल्गुनी पशु मेला में इस वर्ष भी घोड़ा दौड़ प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही. मेला परिसर में व्यापारी संघ एवं घोड़ा मालिकों ने सर्वसम्मति से मिलकर भव्य घोड़ा रेस का आयोजन किया. प्रतियोगिता में तीन दर्जन से अधिक घोड़ों एवं घोड़ियों ने भाग लिया. दूर-दराज से आए घोड़ा मालिक, व्यापारी तथा दर्शकों की भारी भीड़ इस रोमांचक प्रतियोगिता को देखने के लिए उमड़ी. आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया.
मुख्य घोड़ा दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार पटना के रुदल गोप को प्राप्त हुआ. उनके घोड़े “बाबर” के घुड़सवार मेघु रहे, जिन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सभी प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ दिया. द्वितीय पुरस्कार रघुनाथपुर, बेगूसराय के प्रिंस यादव को मिला. उनके घोड़े “रघुनाथपुर एक्सप्रेस” के घुड़सवार राजेश यादव थे, जिन्होंने कड़ी टक्कर दी. तृतीय पुरस्कार गंगौली, बक्सर के योगेंद्र ठाकुर को प्रदान किया गया. उनके घोड़े के घुड़सवार गूंगा रहे, जिन्होंने शानदार नियंत्रण और गति का प्रदर्शन किया.
विशेष पुरस्कार के रूप में केशोवपुर, बक्सर के छोटू मुखिया को सम्मानित किया गया. उनके घोड़े “वीरु” के घुड़सवार मनीष कुमार रहे. प्रतियोगिता के दौरान उनके घोड़े की चुस्ती-फुर्ती और संतुलन ने दर्शकों का मन मोह लिया.
“दो दांत” वर्ग के घोड़ों की अलग दौड़ प्रतियोगिता भी आयोजित की गई. इस वर्ग में धामनिया, आरा के पुतुल चौबे का घोड़ा प्रथम स्थान पर रहा. द्वितीय पुरस्कार अशोक ठेकेदार के घोड़े को मिला, जबकि तृतीय स्थान गौड़ाढ, शाहपुर के शंभू पासवान के घोड़े ने प्राप्त किया.
घोड़ी वर्ग की रेस में नियाज़ीपुर के हीरा यादव की घोड़ी प्रथम रही. द्वितीय पुरस्कार ढाबी के रामचंद्र यादव की घोड़ी को मिला, जबकि तृतीय पुरस्कार तूफान सिंह की घोड़ी को प्रदान किया गया.
छोटी “छकरी” (बच्चा घोड़ा/घोड़ी) दौड़ में धामनिया, आरा के पुतुल चौबे ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया. द्वितीय पुरस्कार केशवपुर के छोटू मिश्रा मुखिया को मिला, जबकि तृतीय पुरस्कार सिसई, सिवान के विजय यादव की घोड़ी को प्रदान किया गया.
सभी प्रतियोगिताएं पांच-पांच राउंड में कराई गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा और भी रोमांचक बन गई. प्रत्येक राउंड में घुड़सवारों ने अपनी कला, संतुलन और घोड़ों की रफ्तार का बेहतरीन प्रदर्शन किया. आयोजन स्थल पर सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण तथा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. व्यापारी संघ एवं घोड़ा मालिकों ने बताया कि ऐसी प्रतियोगिताएं मेले की परंपरा को जीवित रखते हुए घोड़ा पालन एवं व्यापार को बढ़ावा देती हैं. विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया तथा उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया.




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