विकास की रफ्तार पर विराम, जिला परिषद की योजनाएं कागजों में कैद ..

निर्माण के बाद भी भुगतान लंबित है. स्थिति यह है कि पूर्व से बची तथा बीते पांच वर्षों में प्राप्त लगभग 70 करोड़ रुपये की धनराशि अब तक खर्च नहीं हो सकी है और डाक बंगला (अतिथि गृह) के निर्माण के लिए आवंटित 10 करोड़ रुपये भी वापस लौट गए हैं. इससे जिला परिषद सदस्यों में गहरा रोष व्याप्त है.

 






                                         


  • विकासकार्यों में देरी होने की वजह से लगातार बढ़ता जा रहा सदस्यों का आक्रोश
  • 70 करोड़ रुपये खर्च न होने से नाराज सदस्य, 10 करोड़ की राशि भी लौटी

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर :जिला परिषद द्वारा जिले में कराए जाने वाले विकास कार्य अधिकारियों की लापरवाही के कारण ठप पड़ते नजर आ रहे हैं. वित्तीय वर्ष 2021-22 से अब तक सैकड़ों योजनाएं स्वीकृति के अभाव में अटकी हुई हैं, जबकि जिन योजनाओं को स्वीकृति मिली, उनके निर्माण के बाद भी भुगतान लंबित है. स्थिति यह है कि पूर्व से बची तथा बीते पांच वर्षों में प्राप्त लगभग 70 करोड़ रुपये की धनराशि अब तक खर्च नहीं हो सकी है और डाक बंगला (अतिथि गृह) के निर्माण के लिए आवंटित 10 करोड़ रुपये भी वापस लौट गए हैं. इससे जिला परिषद सदस्यों में गहरा रोष व्याप्त है.

जिला परिषद के सभी 20 सदस्यों की योजना थी कि जिले के विभिन्न प्रखंडों और प्रमुख स्थानों पर दुकानों, विवाह गृह, अतिथि गृह और निरीक्षक भवन का निर्माण कराया जाए. इन योजनाओं के माध्यम से जहां हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना थी, वहीं सरकार को भी स्थायी राजस्व का लाभ मिलता. लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और समन्वय की कमी के कारण अधिकांश योजनाएं फाइलों में ही सिमट कर रह गई हैं.

जानकारी के अनुसार, कई प्रस्तावित योजनाएं अब तक विभागीय स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं. जिन योजनाओं का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, उनके संवेदकों को भुगतान नहीं होने से वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. भुगतान लंबित रहने से नए कार्यों में भी रुचि कम हो रही है. इससे विकास की गति पर सीधा असर पड़ रहा है.

डाकबंगला के पुनर्निर्माण के साथ ही दो मंजिला मार्केट कॉम्पलेक्स बनाने की थी योजना

सबसे गंभीर मामला जिला मुख्यालय में स्थित जर्जर हो चुके डाक बंगला (अतिथि गृह) के निर्माण से जुड़ा है. इस परियोजना के लिए 10 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी, लेकिन समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण यह राशि वापस चली गई. जिला परिषद सदस्यों का कहना है कि यदि समय पर पहल की जाती तो जिले को एक आधुनिक अतिथि गृह की सौगात मिल सकती थी, जिसमें दो मंजिला मार्केट परिसर भी प्रस्तावित था जो सैकड़ों परिवारों के जीविकोपार्जन का माध्यम बनता.

कहीं जिला परिषद की जमीन पर अतिक्रमण तो कहीं अधिग्रहण के बाद मुआवजा भी नहीं

जिला परिषद सदस्य राजीव कुमार बताते हैं कि जिले के विभिन्न स्थानों पर जिला परिषद की जमीन पर अतिक्रमण की समस्या भी बढ़ती जा रही है. कई स्थानों पर भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिससे प्रस्तावित निर्माण कार्य अटके हुए हैं. डुमरांव में ही रेलवे स्टेशन रोड में राज हाई स्कूल तक सड़क के किनारे जिला परिषद की जमीन है जिसका अतिक्रमण किया गया है. वहीं, कुछ मामलों में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसी संस्थाओं द्वारा भूमि अधिग्रहण के बाद भी मुआवजा भुगतान लंबित है. इससे परिषद को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो विकास योजनाओं के बजट पर प्रभाव डाल रहा है.

विधानसभा में उठा जिला परिषद का मुद्दा

पिछले पांच वर्षों में कई उप विकास आयुक्त बदले, लेकिन विकास योजनाओं में अपेक्षित तेजी नहीं दिखी. बार-बार अधिकारियों के स्थानांतरण से भी योजनाओं की निरंतरता प्रभावित हुई है. जिला परिषद के सदस्य अब इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने की तैयारी में हैं. उनका कहना है कि यदि जल्द ही स्वीकृति, भुगतान और भूमि से जुड़े मामलों का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे. हाल ही में सदर विधायक आनंद मिश्र ने इस समस्या को विधानसभा में उठाया था.

विकास योजनाओं के कार्यान्वयन से सृजित हो सकते थे रोजगार के व्यापक अवसर

जिला परिषद अध्यक्ष सरोज देवी बताती हैं कि जब से जिला परिषद की नई सरकार का गठन हुआ है, तब से विकास योजनाएं लंबित चल रही हैं. ये योजनाएं कार्यान्वित होने पर रोजगार के काफी अवसर सृजित कर सकती थीं. लगभग 10 करोड़ रुपये की जिन योजनाओं को स्वीकृति मिली, उन्हें कार्यान्वित कराने के बाद भुगतान नहीं मिला. बीते पांच वर्षों में कई उप विकास आयुक्त बदले, लेकिन परिस्थितियां नहीं बदलीं. वर्तमान में पदस्थापित उप विकास आयुक्त ट्रेनिंग पर चली गई हैं तथा अपर समाहर्ता को प्रभार मिला है, लेकिन मामलों में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिख रही है. अधिकारी और जनप्रतिनिधि दोनों जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं, लेकिन यदि कार्य नहीं हो पा रहा तो जनता के समक्ष जवाब देना कठिन हो जाएगा.

अधिकारी कर रहे प्रक्रियाओं की बातें

इस मामले में प्रभारी उप विकास आयुक्त सह अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल प्रक्रियाएं जारी हैं. इसके साथ ही कई योजनाओं की जांच भी कराई जानी है. उम्मीद है कि जल्द ही सब कुछ व्यवस्थित हो जाएगा.

बहरहाल, जिले के लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रशासन विकास कार्यों को गति देने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है. यदि समय रहते निर्णय नहीं लिए गए तो करोड़ों रुपये की योजनाएं यूं ही अधूरी रह जाएंगी और जनता की उम्मीदें अधर में लटकी रह जाएंगी.








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