अनुभव की सज़ा? बिहार के अतिथि शिक्षक उम्र की दीवार से बाहर, TRE-4 में आयु-छूट की मांग तेज ..

अब सरकार से साफ़ मांग कर रहे हैं कि आगामी TRE-4 में उन्हें अतिथि शिक्षक के रूप में दी गई सेवा अवधि के बराबर आयु-छूट दी जाए. साथ ही, जब तक नियमित नियुक्ति पूरी न हो, तब तक उन्हें उनके मूल विद्यालयों में पुनः कार्य करने दिया जाए.







                                         


वर्षों तक पढ़ाया, परीक्षा कॉपियां जांचीं, चुनाव और सर्वे में ड्यूटी निभाई. अब सिर्फ उम्र के कारण भर्ती से बाहर.
हाईकोर्ट की राहत अधूरी, सरकार की चुप्पी से 4,000 शिक्षकों का भविष्य अधर में.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बिहार के सरकारी प्लस टू उच्च विद्यालयों में वर्षों तक सेवा देने वाले हजारों अतिथि शिक्षक आज अपने भविष्य को लेकर गहरे संकट में हैं. जिन्होंने कक्षा 9 से 12 तक छात्रों को पढ़ाया, बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर-पुस्तिकाएं जांचीं और चुनाव से लेकर सरकारी सर्वेक्षण तक में जिम्मेदारियां निभाईं, वे आज शिक्षक भर्ती परीक्षा से बाहर हो चुके हैं. वजह सिर्फ इतनी है कि उनकी उम्र तय सीमा से कुछ साल अधिक हो गई.

31 मार्च 2024 को राज्य सरकार ने अतिथि शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी. शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला बिना किसी लिखित आदेश और पूर्व सूचना के लिया गया. इसके बाद जब बिहार लोक सेवा आयोग ने TRE-3 का आयोजन किया, तब तक अधिकांश अतिथि शिक्षक आयु-सीमा पार कर चुके थे और परीक्षा में बैठने का मौका ही नहीं मिला.

“छह साल पढ़ाया, अब अयोग्य कहलाने लगे”

बक्सर जिले की पूर्व अतिथि शिक्षिका मंजू कुमारी इस पीड़ा की प्रतीक बन चुकी हैं. उन्होंने छह वर्षों तक प्लस टू विद्यालय में अंग्रेजी विषय पढ़ाया. उनके पास स्नातकोत्तर, बीएड, एमएड और STET जैसी सभी आवश्यक योग्यताएं हैं, लेकिन अब वे किसी भी शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए पात्र नहीं रहीं.

मंजू कहती हैं,
“सरकार ने हमारी सेवा के बदले वेटेज अंक तो दिए, लेकिन आयु-छूट नहीं दी. नतीजा यह हुआ कि हम जैसे अनुभवी शिक्षक परीक्षा देने से पहले ही बाहर हो गए.”

हाईकोर्ट का आदेश, फिर भी राहत अधूरी

इस मामले में अतिथि शिक्षकों को आंशिक राहत तब मिली, जब पटना उच्च न्यायालय ने सिविल रिट संख्या 1003/2025 में 31 मार्च 2024 की सेवा समाप्ति को अनुचित मानते हुए निरस्त कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए शिक्षकों को हटाना न्यायसंगत नहीं है.

लेकिन शिक्षकों का आरोप है कि आदेश के अनुपालन के बजाय राज्य सरकार ने उसके खिलाफ अपील दायर कर दी. इसके बाद अतिथि शिक्षकों ने अवमानना वाद दाखिल किया.
MJC संख्या 1153/2025 में, 1 अगस्त को उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग के अपर सचिव को कारण-पृच्छा नोटिस जारी किया.

4,000 शिक्षक, एक जैसी कहानी

शिक्षक संगठनों के अनुसार, राज्य में करीब 4,000 अतिथि शिक्षक नियुक्त किए गए थे. ये नियुक्तियां सरकार के संकल्प, आरक्षण रोस्टर और मेरिट सूची के आधार पर हुई थीं. सेवा अवधि के दौरान इन शिक्षकों से केवल अध्यापन ही नहीं, बल्कि—

  • विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में मतगणना
  • जातीय सर्वेक्षण
  • बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की उत्तर-पुस्तिका मूल्यांकन

जैसे अहम शासकीय कार्य भी कराए गए.

रिक्त पद हैं, फिर भी अनुभवी शिक्षक बाहर

TRE-3 के परिणाम जारी होने के बाद भी कई विषयों में बड़ी संख्या में पद खाली रह गए हैं. भौतिकी, रसायन शास्त्र, गणित, जीव विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों में योग्य अभ्यर्थियों की कमी सामने आई है.

अतिथि शिक्षकों का सवाल है—जब पद खाली हैं और अनुभवी शिक्षक उपलब्ध हैं, तो उन्हें बाहर रखना किस तर्क पर आधारित है?

स्कूलों की जमीनी सच्चाई

बिहार के अधिकांश प्लस टू विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक औसतन आठ सेक्शन चलते हैं और लगभग एक हजार छात्र नामांकित रहते हैं. कई स्कूलों में प्रति विषय केवल एक शिक्षक है.
विज्ञान विषयों में प्रयोगशाला, मूल्यांकन और कक्षा प्रबंधन का पूरा बोझ एक ही शिक्षक पर है. ऐसे में अनुभवी अतिथि शिक्षकों को हटाना शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर डाल रहा है.

मुख्य मांग: TRE-4 में सेवा के बराबर आयु-छूट

अतिथि शिक्षक अब सरकार से साफ़ मांग कर रहे हैं कि आगामी TRE-4 में उन्हें अतिथि शिक्षक के रूप में दी गई सेवा अवधि के बराबर आयु-छूट दी जाए. साथ ही, जब तक नियमित नियुक्ति पूरी न हो, तब तक उन्हें उनके मूल विद्यालयों में पुनः कार्य करने दिया जाए.

नज़रें सरकार के फैसले पर

फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अतिथि शिक्षकों की निगाहें अब राज्य सरकार और मुख्यमंत्री स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय पर टिकी हैं.

यह मामला सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि इस सवाल का भी है कि क्या वर्षों तक सेवा देने वाले शिक्षकों के अनुभव और योगदान को व्यवस्था में कोई वास्तविक महत्व मिलेगा, या अनुभव ही उनकी सबसे बड़ी सज़ा बनकर रह जाएगा.








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