शिवत्व का संदेश गूंजा, सत्य और साधना से जीवन संवारने का आह्वान ..

बताया कि मनुष्य का पहला कर्तव्य है कि वह सत्य का पालन करे, साधना को अपनाए और स्वावलंबी बने. सीमित इच्छाओं में संतोष रखते हुए धर्म के मार्ग पर चलना ही जीवन को सफल बनाता है.

मंदिर में विराजमान शील नाथ जी महाराज (फाइल इमेज)

 






                                 



  • नवरात्र में नाथबाबा मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
  • महामंडलेश्वर शीलनाथ महाराज ने बताया जीवन का मूलमंत्र

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : नवरात्र के पावन अवसर पर शहर के श्री आदिनाथ अखाड़ा स्थित नाथबाबा मंदिर में आध्यात्मिक वातावरण के बीच महामंडलेश्वर शीलनाथ महाराज ने श्रद्धालुओं को शिवत्व का संदेश देते हुए जीवन को सत्य, साधना और स्वावलंबन के मार्ग पर चलाने का आह्वान किया. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे परिसर में भक्ति का माहौल बना रहा.

महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान शिव का जीवन त्याग, तपस्या और संतुलन का अद्भुत उदाहरण है, जिससे हर व्यक्ति को प्रेरणा लेनी चाहिए. उन्होंने बताया कि मनुष्य का पहला कर्तव्य है कि वह सत्य का पालन करे, साधना को अपनाए और स्वावलंबी बने. सीमित इच्छाओं में संतोष रखते हुए धर्म के मार्ग पर चलना ही जीवन को सफल बनाता है.

उन्होंने मृत्यु को अटल सत्य बताते हुए कहा कि मनुष्य को अहंकार त्यागकर ईश्वर का निरंतर स्मरण करना चाहिए. यही मार्ग उसे मोक्ष की ओर ले जाता है. महाराज ने स्पष्ट किया कि जीवन की सच्ची सफलता भगवान और गुरु के चरणों में समर्पण में ही निहित है.

प्रवचन के दौरान उन्होंने भगवान शिव की जटाओं में विराजमान मां गंगा का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गंगा निर्मल और अविरल बहती है, वैसे ही मनुष्य का मन भी पवित्र, शांत और सतत सक्रिय रहना चाहिए. यही शिवत्व का सार है.

महामंडलेश्वर शीलनाथ महाराज ने आगे कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्म को ईश्वर का आदेश मानकर निष्काम भाव से करना चाहिए. बिना राग-द्वेष के किया गया कार्य ही सच्ची भक्ति और कर्तव्यपरायणता की पहचान है, जो अंततः आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है.

अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे शिव के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और समाज के लिए उपयोगी बनें. इस अवसर पर मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी प्रवचन को आत्मसात करने का संकल्प लिया.










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