बरसात के पूर्व मोटरेबल होगी जासो सड़क, विधायक के निर्देश पर भेजा गया नई सड़क निर्माण का प्रस्ताव ..

इस रास्ते से बक्सर से डुमरांव तक का सफर 30 से 45 मिनट में पूरा हो जाता था, लेकिन अब सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और टूटे हिस्सों के कारण लोगों को डेढ़ से दो घंटे तक का समय लग रहा है. कई जगहों पर हालत ऐसी है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है.

हाल ही में हुई बरसात के बाद बक्सर से डुमरांव वाया जासो नदांव जगदीशपुर सड़क की स्थिति

 





                               


  • बरसात से पहले सड़क को मोटरेबल बनाने का दावा, नई डीपीआर की तैयारी शुरू
  • जासो-नदांव-जगदीशपुर वाया डुमरांव सड़क की बदहाली बनी थी बड़ा चुनावी मुद्दा
  • आधे घंटे का सफर अब बन गया है दो घंटे की परेशानी

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : वर्षों से बदहाल पड़ी जासो-नदांव-जगदीशपुर वाया डुमरांव सड़क को लेकर अब विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है. सदर विधायक आनंद मिश्र के निर्देश के आलोक में ग्रामीण कार्य विभाग ने सड़क को मोटरेबल बनाने के लिए प्रस्ताव विभाग को भेज दिया है. विभागीय अधिकारियों का दावा है कि बरसात से पहले सड़क की मरम्मत कर इसे चलने योग्य बना दिया जाएगा. साथ ही नई डीपीआर तैयार कर स्थायी निर्माण की दिशा में भी पहल शुरू कर दी गई है. यह वही सड़क है जिसकी दुर्दशा पिछले विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनी थी और लोगों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक को कटघरे में खड़ा किया था.

करीब साढ़े 18 किलोमीटर लंबी यह सड़क बक्सर और डुमरांव विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग मानी जाती है. पहले इस रास्ते से बक्सर से डुमरांव तक का सफर 30 से 45 मिनट में पूरा हो जाता था, लेकिन अब सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और टूटे हिस्सों के कारण लोगों को डेढ़ से दो घंटे तक का समय लग रहा है. कई जगहों पर हालत ऐसी है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है.

गंदे पानी और जलजमाव ने सड़क को बना दिया तालाब

जासो, जगदीशपुर, सुरौंधा और आसपास के गांवों में नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों का गंदा पानी सीधे सड़क पर बहता है. इससे सड़क पर हमेशा जलजमाव बना रहता है. पानी से भरे गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाने के कारण आए दिन बाइक चालक दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में यह सड़क पूरी तरह जानलेवा बन जाती है.

2011 में बना मार्ग, फिर रखरखाव के अभाव में टूटी सड़क

ग्रामीणों के अनुसार इस सड़क का व्यवस्थित निर्माण वर्ष 2011-12 में कराया गया था. लेकिन लंबे समय तक इसकी मरम्मत और देखरेख नहीं होने के कारण सड़क धीरे-धीरे जर्जर हो गई. भारी वाहनों के दबाव और जलजमाव ने स्थिति को और खराब कर दिया. इसके बाद वर्ष 2021 में सड़क के विशेष मरम्मत और जीर्णोद्धार की योजना बनाई गई.

करोड़ों खर्च के बाद भी डीपीआर की खामी बनी सबसे बड़ी बाधा

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सड़क निर्माण के लिए करीब 3 करोड़ 33 लाख रुपये तथा पांच वर्षों के अनुरक्षण के लिए लगभग 1 करोड़ 62 लाख रुपये की राशि तय की गई थी. हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद डीपीआर की कई तकनीकी खामियां सामने आईं. आरोप लगा कि जासो, जगदीशपुर और सुरौंधा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में नाला निर्माण का प्रावधान ही नहीं रखा गया. इसके अलावा करीब ढाई किलोमीटर हिस्से की प्रशासनिक स्वीकृति भी अधूरी रह गई, जिससे सड़क का काम बीच में अटक गया.

रिश्तों से लेकर धार्मिक यात्राओं तक पर पड़ा असर

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहा. खराब सड़क के कारण कई लोग अब इस रूट के गांवों में शादी-ब्याह के रिश्ते जोड़ने से भी कतराने लगे हैं. वहीं पंचकोशी मेला और परिक्रमा के दौरान देश-विदेश से आने वाले साधु-संत और श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है. लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल मेले के समय अस्थायी पैचवर्क कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है.

चुनावी मुद्दे से विभागीय सक्रियता तक पहुंची सड़क की लड़ाई

पिछले विधानसभा चुनाव में यह सड़क बड़ा चुनावी मुद्दा बनी थी. तत्कालीन विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी को सड़क की बदहाली को लेकर काफी घेरा गया था. अब सदर विधायक आनंद मिश्र ने भी सड़क को लेकर सक्रियता दिखाई है. उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बरसात से पहले सड़क की स्थिति में सुधार किया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके.

जुलाई से पहले सड़क होगी मोटरेबल, विभाग ने भेजा प्रस्ताव

ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता रणविजय सिंह ने बताया कि सड़क की अनुरक्षण अवधि जुलाई में समाप्त हो रही है, लेकिन उससे पहले सड़क को मोटरेबल बना दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि सदर विधायक के निर्देश के आलोक में इसके लिए प्रस्ताव विभाग को भेजा जा रहा है और जल्द ही इसकी स्वीकृति मिलने की उम्मीद है. स्वीकृति के बाद नई डीपीआर तैयार कर स्थायी निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.














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