अपील की है कि वे इस गरिमामयी शाम का हिस्सा बनें. यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि देने का एक माध्यम है, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और कला के सम्मान का एक बेहतरीन उदाहरण भी साबित होगा.
- 'उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए' - बशीर बद्र की मखमली यादों के साथ शुरू होगी भावपूर्ण शाम
- बागीचा लॉन में 11 जून को साबित खिदमत फाउंडेशन का आयोजन, साहित्यकारों और देशप्रेमियों का रहेगा जमावड़ा
साबित खिदमत फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के संयोजक मशहूर शायर साबित रोहतासवी ने बताया कि यह आयोजन देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट करने और साहित्य जगत के उस सितारे को याद करने का एक प्रयास है, जिनकी शायरी ने लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई है.
साबित रोहतासवी ने शहर के तमाम बुद्धिजीवियों और कला प्रेमियों से अपील की है कि वे इस गरिमामयी शाम का हिस्सा बनें. यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि देने का एक माध्यम है, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और कला के सम्मान का एक बेहतरीन उदाहरण भी साबित होगा.






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