जांच एजेंसियों का मानना है कि टॉवर को काटने, बेचने और उसके सामान को ठिकाने लगाने में उसी की मुख्य भूमिका रही है. उसकी गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि टॉवर कितने रुपये में बेचा गया, किसे बेचा गया और उसका लोहा तथा अन्य उपकरण कहां खपाए गए.
- किराया विवाद से शुरू हुआ मामला, पुलिस जांच में सामने आई टॉवर बेचने की कहानी
- 15 केवीए जनरेटर बरामद, मुख्य अभियुक्त की तलाश में लगातार छापेमारी
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : जिले के डुमरांव में 131 फीट ऊंचे मोबाइल टॉवर के रहस्यमय तरीके से गायब होने का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है. जिस घटना को शुरुआत में लोग फिल्मी अंदाज की चोरी मान रहे थे, वह अब किराया विवाद, बकाया भुगतान और कथित अवैध सौदेबाजी से जुड़ा मामला बनकर सामने आया है. मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जमीन मालिक हरेनाथ यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि टॉवर को खरीदने और कटवाने का जिम्मा लेने वाला मुख्य अभियुक्त अभी भी फरार है.
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि वार्ड संख्या-18 स्थित जमीन पर जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर का मोबाइल टॉवर स्थापित था. जमीन और कंपनी के बीच हुआ एग्रीमेंट वर्ष 2022 में समाप्त हो चुका था. जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली कि वर्ष 2017 के बाद से जमीन मालिक को किराए का भुगतान नहीं किया गया था. बताया जाता है कि हरेनाथ यादव ने कई बार कंपनी को नोटिस भेजकर बकाया राशि देने और टॉवर हटाने की मांग की थी, लेकिन कंपनी की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई.
किराया विवाद से पहुंचा मामला जेल तक
इसी नाराजगी के बीच जमीन मालिक ने टॉवर को बेचने का निर्णय लिया. हालांकि पुलिस का कहना है कि किसी कंपनी की संपत्ति को इस प्रकार बेचना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है. इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए हरेनाथ यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
फरार अभियुक्त पर टिकी जांच की नजर
मामले का सबसे अहम किरदार अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. जांच एजेंसियों का मानना है कि टॉवर को काटने, बेचने और उसके सामान को ठिकाने लगाने में उसी की मुख्य भूमिका रही है. उसकी गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि टॉवर कितने रुपये में बेचा गया, किसे बेचा गया और उसका लोहा तथा अन्य उपकरण कहां खपाए गए.
जेनरेटर बरामद, बाकी सामान की तलाश जारी
इस बीच पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता भी मिली है. शनिवार की शाम चोरी गया 15 केवीए जनरेटर बरामद कर लिया गया. अब जांच टीम की नजर टॉवर के अन्य हिस्सों और उपकरणों की बरामदगी पर है. संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है तथा तकनीकी और मानवीय सूचना तंत्र की मदद ली जा रही है.
शहर में चर्चा का विषय बना टॉवर कांड
मामले के खुलासे के बाद पूरे शहर में चर्चा का बाजार गर्म है. लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 131 फीट ऊंचा टॉवर कैसे बेचा गया और उसका सामान कहां पहुंचा. डुमरांव थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने हरेनाथ यादव की गिरफ्तारी और जनरेटर बरामदगी की पुष्टि करते हुए बताया कि फरार अभियुक्त की गिरफ्तारी तथा शेष सामान की बरामदगी के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि जल्द ही पूरे मामले का पूर्ण खुलासा किया जाएगा.





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