18 वर्षों की परंपरा फिर होगी जीवंत, भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू होगा श्रीमद्भागवत महायज्ञ ..

स्थापना के समय केवल सात लोग पहली बैठक में शामिल हुए थे और 11 सदस्यों की एक छोटी समिति बनी थी. लेकिन समय के साथ यह आयोजन जनआस्था का बड़ा केंद्र बन गया. इस वर्ष समिति अपने 18वें आयोजन का आयोजन करने जा रही है.

बैठक करते आचार्य व अन्य 





                               

  • 8 जून से 15 जून तक चलेगा श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सह श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ
  • समिति का फैसला, घर-घर जाकर नहीं लिया जाएगा चंदा, भक्तों की स्वेच्छा से होगा सहयोग

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : शहर में एक बार फिर भक्ति, आस्था और सनातन परंपरा का भव्य संगम देखने को मिलेगा. सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्ध आश्रम धाम, बक्सर द्वारा आयोजित होने वाले श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सह श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं. गुरुवार को इस महाआयोजन की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें अब तक हुए कार्यों की समीक्षा के साथ आगे की रणनीति तय की गई.

समिति के सदस्यों ने बताया कि इस संस्था की स्थापना 2 जून 2007 को हुई थी. स्थापना के समय केवल सात लोग पहली बैठक में शामिल हुए थे और 11 सदस्यों की एक छोटी समिति बनी थी. लेकिन समय के साथ यह आयोजन जनआस्था का बड़ा केंद्र बन गया. इस वर्ष समिति अपने 18वें आयोजन का आयोजन करने जा रही है, जिसे लेकर सदस्यों और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है.

समिति द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार 8 जून की सुबह 7 बजे जलभरी और भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी. यह यात्रा शास्त्रानुसार रामरेखा घाट स्थित रामेश्वर नाथ मंदिर से शुरू होकर पीपर पाती रोड, मुनीम चौक, पुराना अस्पताल रोड, यमुना चौक और पुलिस चौकी मार्ग से होते हुए श्री कैलाश मंडपम रामेश्वर नाथ मंदिर पहुंचेगी, जहां कलश स्थापना की जाएगी.

सनातन परंपरा की झलक दिखेगी यात्रा में

समिति ने निर्णय लिया है कि महिलाएं हिंदू रीति-रिवाज और सनातन परंपरा के अनुसार साड़ी पहनकर शामिल होंगी, जबकि पुरुष भी शास्त्रानुसार वस्त्र धारण करेंगे. महिलाएं अपने हाथों में कलश लेकर चलेंगी और पुरुष श्रीमद्भागवत महापुराण को अपने माथे पर धारण कर हरिनाम संकीर्तन एवं गाजे-बाजे के साथ यात्रा को भव्य स्वरूप देंगे.

संत सम्मेलन और कथा का भी होगा आयोजन

जलभरी यात्रा के बाद यज्ञ की विधियां प्रारंभ हो जाएंगी. वहीं प्रतिदिन शाम 3 बजे से संत सम्मेलन और विद्वत संगोष्ठी का आयोजन होगा, जबकि शाम 4 बजे से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का श्रवण कराया जाएगा.

स्वेच्छा से होगा सहयोग, घर-घर नहीं मांगा जाएगा चंदा

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आयोजन के लिए समिति किसी व्यक्ति से बाहर घूमकर चंदा नहीं लेगी. मंदिर परिसर में श्रद्धालु अपनी इच्छा से जो दान या सहयोग देंगे, उसी को स्वीकार किया जाएगा.

कार्यक्रम की अध्यक्षता शास्त्री जी (पौराणिक जी महाराज) ने की. उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार जलभरी यात्रा में नियमानुसार एक कदम चलने पर अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है. उन्होंने बक्सरवासियों से परिवार सहित अधिक से अधिक संख्या में कलश यात्रा में शामिल होने की अपील की.

बैठक में लक्ष्मण ओझा, अजय पांडे, अमित जी, मृत्युंजय दुबे, अनुराग पांडे, जगदीश जायसवाल, जयप्रकाश सिंह, छोटे उपाध्याय, सुरेंद्र तिवारी, गोपाल जी पांडे, वशिष्ठ नारायण चौबे, विपुल चौबे, संतोष पांडे, नरसिंह मल्लाह सहित सैकड़ों सदस्य उपस्थित रहे.













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