बक्सर सहित पूरे राज्य के निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और एनओसी की सघन जांच कराने की मांग उठाई है. उन्होंने कहा कि यदि जांच में अस्पताल संचालन के दौरान नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित लोगों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.
- प्रदेश प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन बोले- सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर हो सख्त कार्रवाई
- अस्पतालों की एनओसी, अग्निशमन व्यवस्था और स्वास्थ्य मानकों की समीक्षा कराने की मांग
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड में चार लोगों की मौत के बाद बिहार की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है. इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने बक्सर सहित पूरे राज्य के निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और एनओसी की सघन जांच कराने की मांग उठाई है. उन्होंने कहा कि यदि जांच में अस्पताल संचालन के दौरान नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित लोगों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.
बुधवार सुबह मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में अचानक शॉर्ट सर्किट से आग लग गई. आग तेजी से फैलने के कारण अस्पताल में अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई. इस दर्दनाक हादसे में चार मरीजों की मौत हो गई, जबकि दमकल विभाग और प्रशासन की टीम ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर करीब 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि यह केवल एक अस्पताल की दुर्घटना नहीं बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों को सामने लाने वाली घटना है. उन्होंने कहा कि बक्सर सहित राज्य के कई जिलों में निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वहां अग्निशमन, आपातकालीन निकासी और अन्य सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है या नहीं.
एनओसी और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी तो उसे संचालन की अनुमति और एनओसी कैसे प्रदान की गई. उनका कहना था कि प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय होना भी जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.
राज्यव्यापी ऑडिट की मांग
कांग्रेस प्रवक्ता ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री से भी बिहार के अस्पतालों की स्थिति की जमीनी समीक्षा करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले को केवल एक सामान्य हादसे के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि राज्यभर के निजी अस्पतालों का व्यापक ऑडिट कराया जाना चाहिए.
प्रशासन ने तेज की जांच प्रक्रिया
उधर जिला प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जांच प्रक्रिया तेज कर दी है. मृतकों के परिजनों के लिए चार-चार लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की घोषणा भी की गई है. घटना के बाद लोगों के बीच अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता और सवाल दोनों बढ़ गए हैं.
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