उद्घाटन से पहले धंसा 26.40 करोड़ का इटाढ़ी आरओबी, कांग्रेस का हमला- श्रेय लेने वाले अब जवाब दें ..

उनका आरोप है कि कमीशनखोरी के कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हुई, जिसके चलते उद्घाटन से पहले ही पुल का हिस्सा धंस गया. उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार हुआ होता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती.


 





                               




  • जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल
  • कहा- श्रेय लेने की होड़ थी तो अब तकनीकी खामियों पर भी जवाबदेही तय हो

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : उद्घाटन से पहले ही इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. करीब 26.40 करोड़ रुपये की लागत से बने इस आरओबी को लेकर कांग्रेस ने बिहार सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने इसे भ्रष्टाचार और निर्माण कार्य में लापरवाही का नतीजा बताया है.

पंकज उपाध्याय ने कहा कि बिहार में निर्माण कार्यों में लगातार अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं और इटाढ़ी आरओबी की घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा है. उनका आरोप है कि कमीशनखोरी के कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हुई, जिसके चलते उद्घाटन से पहले ही पुल का हिस्सा धंस गया. उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार हुआ होता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती.

उन्होंने निर्माण में उपयोग की गई सामग्री पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि पुल निर्माण में लगाए गए सरिये और अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता जांच के दायरे में आनी चाहिए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आम लोग अपने घरों के निर्माण में भी इससे बेहतर गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग करते हैं.

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने सदर विधायक आनंद मिश्रा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब आरओबी निर्माण को लेकर श्रेय लेने की होड़ लगी हुई थी, तब इसकी गुणवत्ता की निगरानी क्यों नहीं की गई. उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि इस परियोजना की उपलब्धि का श्रेय ले रहे थे, तो अब इसकी खामियों और विफलताओं पर भी जवाब देना चाहिए.

गौरतलब है कि इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग पर लंबे समय से लगने वाले जाम से लोगों को राहत दिलाने के उद्देश्य से इस आरओबी का निर्माण कराया गया था. पुल शुरू होने के बाद 1 जून से रेलवे क्रॉसिंग भी बंद कर दी गई थी और वाहनों का आवागमन नए पुल के माध्यम से शुरू हो गया था. हालांकि पुल के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने की सूचना के बाद प्रशासन ने एहतियातन भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी है.

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच निर्माण गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है. राजनीतिक दलों और आम नागरिकों द्वारा मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी उठने लगी है.













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