कहा कि जिस पुल का अभी तक औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ था और जिसे कुछ दिन पहले ही लोगों के आवागमन के लिए खोला गया था, उसका इस तरह क्षतिग्रस्त होना बेहद गंभीर मामला है.
- इटाढ़ी रेल ओवरब्रिज हादसे को डबल इंजन सरकार की विफलता बताया
- रेल मंत्री से जांच, कार्रवाई और बंद रेल फाटक खोलने की मांग
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : जिले के इटाढ़ी गुमटी के समीप करीब 26.40 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नवनिर्मित रेल ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के मामले ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है. इस मामले में सांसद सुधाकर सिंह ने केंद्र और बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे "डबल इंजन सरकार के भ्रष्टाचार का जीता-जागता प्रमाण" बताया है. उन्होंने कहा कि जिस पुल का अभी तक औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ था और जिसे कुछ दिन पहले ही लोगों के आवागमन के लिए खोला गया था, उसका इस तरह क्षतिग्रस्त होना बेहद गंभीर मामला है.
सांसद ने कहा कि सरकार लगातार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन बक्सर का यह पुल उन दावों की सच्चाई सामने ला रहा है. उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बना पुल उद्घाटन से पहले ही सवालों के घेरे में आ गया है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं.
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और मिलीभगत का मामला प्रतीत होता है. जनता के पैसे से बने निर्माण कार्यों में ऐसी स्थिति लोगों के विश्वास को कमजोर करती है.
उन्होंने यह भी कहा कि रेल ओवरब्रिज चालू होने के बाद 31 मई 2026 को बक्सर स्टेशन के पूर्वी दिशा स्थित रेल फाटक को बंद कर दिया गया था. अब पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
सांसद ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है. साथ ही निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों, अभियंताओं, गुणवत्ता निरीक्षकों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की है.
उन्होंने कहा कि बक्सर की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर 26.40 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद ऐसा पुल कैसे बना जो उद्घाटन से पहले ही जवाब दे गया. जनता की सुरक्षा और सरकारी धन का सही उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.






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