बहुजन सेना ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं (जैसे शौचालय और पेयजल) को दुरुस्त किए बिना शिक्षकों पर दबाव बनाया गया, तो यह सरकारी स्कूलों की साख को और अधिक नुकसान पहुँचाएगा.
- अपनी दो दिवसीय बक्सर - कैमूर यात्रा के दौरान शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दिया था बयान
- बहुजन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं अनिल कुमार
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बिहार के शिक्षा मंत्री द्वारा स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर दिए गए सख्त निर्देश के बाद अब राजनीतिक गलियारों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं. बहुजन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार ने शिक्षा मंत्री के इस फरमान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और उनसे तीखे सवाल पूछे हैं.
"शौचालय नहीं, तो शिक्षक क्या मंत्री आवास जाएँ?"
बहुजन सेना प्रमुख अनिल कुमार ने शिक्षा मंत्री के 'एआई मॉनिटरिंग' और बाउंड्री से बाहर जाने पर हाजिरी काटने वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा, "शिक्षा मंत्री यह बताने का कष्ट करें कि जिन विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के नाम पर शौचालय तक नहीं हैं, वहाँ के शिक्षक शौच के लिए कहाँ जाएँगे?" उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि क्या शिक्षा मंत्री के आदेशानुसार शिक्षकों को उनके सरकारी आवास या कार्यालय का रुख करना चाहिए?
निजी संस्थानों को बढ़ावा देने का आरोप
शिक्षा मंत्री के एक निजी शैक्षणिक संस्थान के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पर भी अनिल कुमार ने उन्हें घेरा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर सख्ती बरत रही है, तो दूसरी ओर मंत्री निजी संस्थानों को बढ़ावा देकर 'शिक्षा माफिया' का साथ दे रहे हैं.
बहुजन सेना अध्यक्ष ने चुनौती भरे लहजे में पूछा, "क्या मंत्री जी यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि इन निजी संस्थानों में गरीब और दलित परिवार के बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे? या फिर यह सिर्फ संपन्न वर्ग के लिए है?"
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
अनिल कुमार का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब बिहार के शिक्षा विभाग में लगातार बड़े बदलाव और सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं. बहुजन सेना ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं (जैसे शौचालय और पेयजल) को दुरुस्त किए बिना शिक्षकों पर दबाव बनाया गया, तो यह सरकारी स्कूलों की साख को और अधिक नुकसान पहुँचाएगा.
फिलहाल, शिक्षा मंत्री के इस बयान और बहुजन सेना के आरोपों के बाद शिक्षक संघों और शिक्षा विभाग के बीच खींचतान बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.





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