कहा, "अली बाबा कौन है, यह जांच का विषय है. हो सकता है 40 चोरों में से 30 उनके साथ ही घूम रहे हों." तिवारी ने इस विवाद को एक नया मोड़ देते हुए इसे जांच की मांग तक पहुँचा दिया.
- कमीशनखोरी' के आरोपों पर मुन्ना तिवारी का पलटवार
- महदह पुल विवाद और दुर्घटनाओं का मुद्दा
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बिहार के बक्सर में इन दिनों राजनीतिक पारा अपने चरम पर है. पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी और वर्तमान विधायक आनंद मिश्रा के बीच छिड़ी 'जुबानी जंग' अब एक व्यक्तिगत और तीखे टकराव में तब्दील हो गई है. हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी ने वर्तमान विधायक आनंद मिश्रा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और उन्हें सार्वजनिक मंच पर अपनी संपत्ति की जांच कराने की चुनौती दे डाली.
पिछले कुछ महीनों से वर्तमान विधायक आनंद मिश्रा द्वारा बक्सर में 'कमीशनखोरी' का खेल चलने और पूर्व के कार्यकाल को दागदार बताने के आरोपों पर मुन्ना तिवारी का सब्र का बांध टूट गया है. तिवारी ने कहा कि वे पिछले आठ महीनों से इन आरोपों को चुपचाप सुन रहे थे, लेकिन अब जवाब देना जरूरी हो गया है. उन्होंने अपने 10 वर्षों के कार्यकाल को 'विकास और सुशासन' का दौर बताते हुए कहा, "मैंने सड़कों से लेकर कृषि और नौजवानों के रोजगार तक के लिए काम किया है. अगर मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, तो इसकी खुली जांच होनी चाहिए."
महद में निर्माणाधीन पुल के मुद्दे पर सफाई देते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि पुराने पुल के सुदृढ़ीकरण की कोई सरकारी योजना नहीं होती है. उन्होंने बताया कि उस पुल के सकरा होने के कारण वहां अक्सर दुर्घटनाएं होती थीं, जिसे लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने चुनौती दी कि यदि वे गलत साबित हुए तो सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को तैयार हैं.
'अली बाबा' वाले बयान पर तंज
विधायक आनंद मिश्रा द्वारा दिए गए 'अली बाबा और 40 चोर' वाले बयान पर मुन्ना तिवारी ने जोरदार पलटवार किया. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, "अली बाबा कौन है, यह जांच का विषय है. हो सकता है 40 चोरों में से 30 उनके साथ ही घूम रहे हों." तिवारी ने इस विवाद को एक नया मोड़ देते हुए इसे जांच की मांग तक पहुँचा दिया.
आईपीएस कार्यकाल और एनजीओ पर गंभीर सवाल
मुन्ना तिवारी ने आनंद मिश्रा के आईपीएस (IPS) पृष्ठभूमि पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल के दौरान जिन जिलों में उनकी तैनाती रही, वहां मादक पदार्थों की तस्करी हुई है और उसी पैसे से उन्होंने संपत्ति बनाई है. तिवारी ने विधायक के एनजीओ (NGO) की फंडिंग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास जो अकूत संपत्ति है, उसकी सीबीआई या उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए.
दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए
मुन्ना तिवारी ने अंत में एक बड़ी चुनौती पेश की. उन्होंने कहा, "मैं मांग करता हूँ कि पिछले 10 वर्षों में मेरी संपत्ति और आनंद मिश्रा के 12 वर्षों के आईपीएस कार्यकाल की संपत्ति की निष्पक्ष जांच हो. इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा."
बक्सर की जनता अब इस आर-पार की लड़ाई को देख रही है. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है या फिर वास्तव में किसी जांच की प्रक्रिया शुरू होती है. फिलहाल, इस जंग ने बक्सर के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है.
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