संवेदक ने बक्सर व्यवहार न्यायालय से अग्रिम जमानत ले ली हैं. उन्होंने यह भी बताया कि प्रारंभिक जांच में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग परिलक्षित हो रहा है लेकिन, तकनीकी जांच के बाद ही इसके बारे में कुछ कहा जा सकेगा.
- कानूनी जानकारों ने कहा - मामले केवल लापरवाही नहीं भ्रष्टाचार का भी
- तकनीकी जानकार का पक्ष - घटिया निर्माण सामग्री का किया गया प्रयोग
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : इटाढ़ी क्रॉसिंग आरओबी के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के मामले में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के कनीय अभियंता ने सासाराम के संवेदक प्रमोद सिंह के विरुद्ध मुफस्सिल थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है. उनका कहना है कि कार्य में लापरवाही के कारण ऐसी परिस्थिति सामने आई जिससे जान माल का खतरा हो सकता था. इस मामले में पुलिस ने बीएनएस की धारा - 290/32 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है. सब इंस्पेक्टर सह इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग मुफस्सिल आउट पोस्ट के प्रभारी गुड्डू चौधरी पुलिस केस के जांच अधिकारी बनाए गए हैं.
गुड्डू चौधरी के मुताबिक इस मामले में थाना स्तर से भी जमानत मिल सकती थी, लेकिन संवेदक ने बक्सर व्यवहार न्यायालय से अग्रिम जमानत ले ली हैं. उन्होंने यह भी बताया कि प्रारंभिक जांच में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग परिलक्षित हो रहा है लेकिन, तकनीकी जांच के बाद ही इसके बारे में कुछ कहा जा सकेगा.
दूसरी तरफ कानूनी जानकर बताते हैं कि इस तरह का एफआइआर भी कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है. संवेदक पर केवल लापरवाही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के आरोपों में भी प्राथमिकी दर्ज कराना चाहिए. ऐसा नहीं करना यह स्पष्ट करता है कि मामले की लीपापोती की जा रही है.
अधिवक्ता राम नारायण बताते हैं कि इस मामले में यह पूरी तरह साफ है कि निर्माण में लापरवाही नहीं बल्कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. निश्चित रूप से पैसे बचाने के लिहाज से बग़ैर गुणवता की सामग्री का प्रयोग किया गया है. उन्होंने कहा कि मामले कि उच्च स्तरीय जांच होने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.
इंटक नेता ने निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी पहलुओं पर उठाए सवाल
इंटक मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष तथा पथ निर्माण विभाग के पूर्व संवेदक, पप्पू पांडेय ने आरओबी निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी पहलुओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने दावा किया है कि एलिवेटेड अप्रोच आरओबी का एक महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल हिस्सा है, जिसे नजरअंदाज किया गया है. उन्होंने छड़ों के गलत चयन, उनके बीच की मानक दूरी का पालन न करने और मेन बार व डिस्ट्रीब्यूशन बार में 8एमएम-10एमएम की छड़ों के अनुचित उपयोग पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि पुल के निर्माण में उपयोग की गई कंक्रीट/गिट्टी में सीमेंट का सही मिश्रण (कंपाउंड) नहीं है, जिससे गिट्टियाँ आसानी से उखड़ रही हैं. ठेकेदार और संबंधित इंजीनियरों ने पैसे बचाने के लिए मानकों की अनदेखी की है.
संवेदक ही नहीं इंजीनियर्स पर भी हो एफआइआर
उन्होंने बताया कि पुल के 'पारापेट' निर्माण में एक्सपेंशन गैप के लिए मानक 'थर्माकोल' के बजाय घटिया 'प्लाई' का इस्तेमाल किया गया है, जो बेहद निराशाजनक है. उन्होंने सवाल उठाया है कि निर्माण के समय सहायक और कनीय अभियंता कहाँ थे? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने जिला पदाधिकारी को गलत जानकारी देकर गुमराह किया है. पप्पू पांडेय ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच हो और केवल ठेकेदार पर ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार सहायक, कनीय और कार्यपालक अभियंताओं पर भी एफआईआर दर्ज की जाए. उन्होंने इसे रिपेयर के नाम पर खानापूर्ति न करके एक ठोस और तकनीकी जाँच की आवश्यकता पर बल दिया है.
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