फर्जी वंशावली बनाकर संपत्ति हड़पने के आरोप में ससुर-सास को नहीं मिली राहत ..

पति की मृत्यु के बाद ससुराल पक्ष ने उसके साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया और उसके जेवर भी अपने पास रख लिए. आरोप है कि उसके हिस्से की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई.





                              





  • विधवा बहू और उसकी पुत्री का नाम वंशवृक्ष से हटाने का है आरोप
  • बक्सर कोर्ट ने प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिलने पर अग्रिम जमानत याचिका की खारिज

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : कथित रूप से फर्जी वंशवृक्ष तैयार कर विधवा बहू और उसकी पुत्री को पैतृक संपत्ति के अधिकार से वंचित करने के मामले में आरोपित ससुर मृत्युंजय कुमार राय और तारा मुनि देवी को अदालत से राहत नहीं मिली. अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय, बक्सर ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. न्यायालय ने कहा कि केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रथमदृष्टया आरोपों की पुष्टि करते हैं.

बक्सर नगर थाना कांड संख्या 118/2026 में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार वादिनी शिल्पी राय ने आरोप लगाया है कि पति की मृत्यु के बाद ससुराल पक्ष ने उसके साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया और उसके जेवर भी अपने पास रख लिए. आरोप है कि उसके हिस्से की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई तथा न्यायालय में दाखिल रिवीजन याचिका के साथ कथित रूप से ऐसा वंशवृक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिल्पी राय और उसकी पुत्री का नाम शामिल नहीं किया गया.

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत से कहा कि दोनों आवेदकों को झूठा फंसाया गया है और वे निर्दोष हैं. वहीं अभियोजन पक्ष ने केस डायरी में दर्ज गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत का विरोध किया. न्यायालय ने पाया कि वादिनी समेत कई गवाहों ने कथित जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोपों का समर्थन किया है तथा वंशवृक्ष में नाम नहीं होने की बात भी कही है.

न्यायालय ने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि मृत्युंजय कुमार राय के विरुद्ध पूर्व से तीन तथा तारा मुनि देवी के विरुद्ध एक आपराधिक मामला दर्ज है. सभी तथ्यों, केस डायरी और आरोपों की गंभीरता पर विचार करने के बाद अदालत ने माना कि दोनों आवेदकों के विरुद्ध प्रथमदृष्टया मामला बनता है. इसके बाद अग्रिम जमानत आवेदन संख्या 538/2026 को खारिज कर दिया गया.














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