बच्चों ने उत्साह के साथ बाल भोज का आनंद लिया और एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं. इसके बाद विद्यार्थियों के बीच कॉपी, कलम समेत अन्य जरूरी पाठ्य सामग्री का वितरण किया गया.
- बाल भोज में चाट, गोलगप्पे और आइसक्रीम का बच्चों ने लिया भरपूर आनंद
- कॉपी-कलम पाकर बच्चों का बढ़ा उत्साह, शिक्षा का संदेश हुआ मजबूत
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : सिमरी प्रखंड के बलिहार गांव में पिछले पांच वर्षों से जल रही शिक्षा की अलख अब सैकड़ों जरूरतमंद बच्चों के जीवन में नई उम्मीद की रोशनी बन रही है. बाबू रामाशंकर सिंह स्मारक निशुल्क शिक्षा केंद्र में आयोजित बाल भोज एवं पाठ्य सामग्री वितरण कार्यक्रम बच्चों के लिए यादगार बन गया. कार्यक्रम में बच्चों को स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ शैक्षणिक सामग्री प्रदान की गई, जिससे उनके चेहरों पर खुशी साफ नजर आई.
कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों बच्चों के लिए चाट, गोलगप्पे और आइसक्रीम की विशेष व्यवस्था की गई थी. बच्चों ने उत्साह के साथ बाल भोज का आनंद लिया और एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं. इसके बाद विद्यार्थियों के बीच कॉपी, कलम समेत अन्य जरूरी पाठ्य सामग्री का वितरण किया गया.
यह शिक्षा केंद्र नवज्योति सेवा संस्थान के सहयोग से पिछले पांच वर्षों से लगातार संचालित किया जा रहा है. यहां कक्षा एक से आठवीं तक के जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण निशुल्क शिक्षा के साथ आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है.
शिक्षा केंद्र के संचालक एवं पत्रकार गुलशन सिंह ने कहा कि समाज में बदलाव केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी भी समझनी होगी. उन्होंने कहा कि छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन का कारण बन सकते हैं. इसी सोच के साथ "शिक्षार्थ आइए, सेवार्थ जाइए" के संकल्प को लेकर गांव में शिक्षा की मशाल जलाने का कार्य किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि उन्हें अपने दादा स्वर्गीय बाबू रामाशंकर सिंह से जीवन के कई महत्वपूर्ण संस्कार और मूल्य सीखने को मिले थे. उन्हीं की प्रेरणा और आदर्शों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उनकी स्मृति में इस निशुल्क शिक्षा केंद्र की स्थापना की गई. आज यह केंद्र ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों बच्चों के लिए शिक्षा का मजबूत आधार बन चुका है.
स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पत्रकारिता के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़कर गुलशन सिंह समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की पहल न सिर्फ बच्चों के भविष्य को बेहतर बना रही है, बल्कि समाज में शिक्षा के महत्व को भी नई मजबूती दे रही है.






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