कहा कि भरत तिवारी का तरीका गलत हो सकता है, लेकिन उसकी मांग जायज थी. उन्होंने आरोप लगाया कि आर्म्स सौंपने के बाद जिस प्रकार की कार्रवाई हुई, उसने पुलिस की कार्यशैली और वर्तमान सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं.

- पुलिस मुठभेड़ मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
- डीजीपी और मुख्यमंत्री से मिलकर सौंपेंगे ज्ञापन, न्याय तक लड़ाई जारी रखने का दावा
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव निवासी भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मृत्यु के मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है. पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी गुरुवार को बिलौटी गांव पहुंचे, जहां उन्होंने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया. इस दौरान उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि भरत तिवारी ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, तो उसके बाद हुई घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है.
पूर्व विधायक ने कहा कि स्थानीय लोगों और परिजनों द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि भरत तिवारी ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था. यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को कानून के अनुसार न्याय पाने का अधिकार है और सत्य सामने आना चाहिए.
मुन्ना तिवारी ने परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर उन्हें इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करें. उन्होंने कहा कि भरत तिवारी का तरीका गलत हो सकता है, लेकिन उसकी मांग जायज थी. उन्होंने आरोप लगाया कि आर्म्स सौंपने के बाद जिस प्रकार की कार्रवाई हुई, उसने पुलिस की कार्यशैली और वर्तमान सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए.
पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि एक ओर भरत तिवारी को मानसिक रूप से कमजोर या विक्षिप्त बताया गया और दूसरी ओर अगले ही दिन उसकी मृत्यु हो जाती है. यह स्वयं गंभीर जांच का विषय है. उन्होंने दावा किया कि न्याय मिलने तक इस मुद्दे पर उनकी लड़ाई जारी रहेगी.
मुन्ना तिवारी ने बताया कि वह जल्द ही बिहार के पुलिस महानिदेशक तथा मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें लिखित ज्ञापन सौंपेंगे और पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग करेंगे. उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि कानून के शासन, मानवाधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जुड़ा विषय है. इसलिए सरकार और प्रशासन को सभी तथ्यों को सार्वजनिक कर मामले की सच्चाई सामने लानी चाहिए.




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