पुरुषोत्तम मास में गूंजा हरिनाम, हजारों श्रद्धालुओं की कलश यात्रा से शुरू हुआ भागवत महायज्ञ ..

धार्मिक अनुष्ठान 8 जून से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा. वैदिक परंपरा के अनुसार जलभरी कार्यक्रम का शुभारंभ श्री रामेश्वर नाथ मंदिर स्थित कैलाश यज्ञ मंडपम में पूजा-अर्चना के साथ किया गया. प्रातः 7 बजे श्रद्धालुओं का जत्था गाजे-बाजे और हरिनाम संकीर्तन के साथ नगर भ्रमण पर निकला.





                               




  • शोभायात्रा के साथ 15 जून तक चलने वाले धर्म आयोजन का हुआ शुभारंभ
  • गंगा जल लेकर श्रद्धालुओं ने नगर भ्रमण किया, व्यासपीठ से धर्म और कथा पर दिए गए संदेश

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम, बक्सर द्वारा आयोजित 18वें धर्म आयोजन श्रीमद्भागवत कथा सह लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का शुभारंभ सोमवार को भव्य शोभायात्रा और कलश यात्रा के साथ हुआ. पूरे शहर में हरिनाम संकीर्तन और धार्मिक जयघोष से माहौल भक्तिमय बना रहा. हजारों महिला-पुरुष पीतल और तांबे के कलश लेकर नगर भ्रमण में शामिल हुए.

समिति के अनुसार यह धार्मिक अनुष्ठान 8 जून से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा. वैदिक परंपरा के अनुसार जलभरी कार्यक्रम का शुभारंभ श्री रामेश्वर नाथ मंदिर स्थित कैलाश यज्ञ मंडपम में पूजा-अर्चना के साथ किया गया. प्रातः 7 बजे श्रद्धालुओं का जत्था गाजे-बाजे और हरिनाम संकीर्तन के साथ नगर भ्रमण पर निकला.

शोभायात्रा पीपी रोड, पुराना सदर अस्पताल रोड, मेन रोड, बड़ी देवी, यमुना चौक और नगर परिषद मॉडल थाना क्षेत्र से होते हुए श्री रामरेखा घाट पहुंची. यहां श्रद्धालुओं ने गंगा पूजन कर कलश में गंगाजल भरा और पुनः श्री रामेश्वर नाथ मंदिर परिसर पहुंचकर यज्ञ मंडप की परिक्रमा के बाद कलश स्थापित किए.

समिति के सदस्यों ने बताया कि वैदिक विधि के अनुसार प्रातःकाल में निकाली गई कलश यात्रा को अत्यंत शुभ माना गया है और प्रत्येक वर्ष इसी परंपरा का पालन किया जाता है.

सायंकाल संतों और विद्वानों का पूजन तथा आशीर्वचन कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसके बाद व्यासपीठ पूजन किया गया. इस दौरान व्यासपीठ से उपस्थित आचार्य श्री पौराणिक जी ने धर्म, भागवत कथा और उसकी परंपराओं पर अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा को केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का वाङ्मय स्वरूप मानकर श्रद्धा और आस्था के साथ सुनना चाहिए.

उन्होंने कहा कि भागवत कथा मानव जीवन में सुख, शांति और सदाचार की स्थापना का माध्यम है तथा यह समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करती है. श्रद्धालुओं के लिए यह कथा जीवन में आध्यात्मिक चेतना और मानवता के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है. आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही.













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