डुमरांव अस्पताल मामले में प्रबंधक अफरोज आलम को जमानत, अधिवक्ता का तर्क - सिविल सर्जन पर एफआइआर क्यों नहीं?

बताया कि उनके वरिष्ठ अधिवक्ता शिव प्रकाश नारायण द्वारा जमानत याचिका दायर की गई थी. सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से विभिन्न कानूनी बिंदुओं को अदालत के समक्ष रखा गया. खासकर यह बताया गया कि सभी धाराएं जमानतीय हैं.



                              
  • - जमानतीय थी सभी धाराएं, न्यायालय से मिली राहत
  • - वरिष्ठ अधिवक्ता शिव प्रकाश नारायण ने दाखिल की थी जमानत याचिका

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल से जुड़े चर्चित मामले में अस्पताल प्रबंधक अफरोज आलम को न्यायालय से जमानत मिल गई है. अफरोज आलम, नसीमुद्दीन आलम के पुत्र हैं और पटना के फुलवारीशरीफ स्थित न्यू मिल्लत कॉलोनी के निवासी हैं. उनके विरुद्ध डुमरांव में कांड संख्या 148/26 दर्ज हुआ था. 

अधिवक्ता ने मामले की जांच और जवाबदेही को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल में हुई कथित अनियमितताओं और लापरवाही के लिए कार्रवाई की जा रही है, तो सिविल सर्जन के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज क्यों नहीं की गई?

मामले में अधिवक्ता सत्य प्रकाश राय ने बताया कि उनके वरिष्ठ अधिवक्ता शिव प्रकाश नारायण द्वारा जमानत याचिका दायर की गई थी. सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से विभिन्न कानूनी बिंदुओं को अदालत के समक्ष रखा गया. खासकर यह बताया गया कि सभी धाराएं जमानतीय हैं.

मामला दाखिल होने के तुरंत बाद न्यायालय ने अफरोज आलम को जमानत प्रदान कर दी. अधिवक्ता सत्य प्रकाश राय ने बताया कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने राहत प्रदान की है.

गौरतलब है कि डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल का मामला हाल के दिनों में काफी सुर्खियों में रहा है. मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट (MNCU) के बाहर नवजात बच्चों का इलाज किए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने जांच कराई थी. इसके बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी. अब इस मामले में जमानत मिलने और सिविल सर्जन की भूमिका को लेकर अधिवक्ता द्वारा उठाए गए सवालों की चर्चा हो रही है.












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