वीडियो : मरीज को लेकर पहुंची युवती ने खुद ही लगा दिया इंजेक्शन, जांच रिपोर्ट पर उठ रहे कई सवाल ..

इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सह आरटीआई कार्यकर्ता हरे कृष्णा सिंह उर्फ कृष्णा यादव ने अस्पताल प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.





                              


  • अस्पताल प्रशासन ने बताया- भाई के इलाज के दौरान युवती ने स्वेच्छा से लगाया था इंजेक्शन
  • आरटीआई कार्यकर्ता ने जांच रिपोर्ट को बताया मनगढ़ंत, उच्चस्तरीय जांच की मांग

बक्सर टॉप न्यूज़,  बक्सर : जिले के डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल डुमरांव का एक पुराना वीडियो एक बार फिर चर्चा में आ गया है. वीडियो में एक युवती को आकस्मिक विभाग में इंजेक्शन लगाते हुए देखा जा सकता है. इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सह आरटीआई कार्यकर्ता हरे कृष्णा सिंह उर्फ कृष्णा यादव ने अस्पताल प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.

हरे कृष्णा सिंह ने बताया कि 16 अप्रैल 2026 को अस्पताल के आकस्मिक विभाग में एक अज्ञात युवती द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने की शिकायत उन्होंने की थी. शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से जांच कराई गई. जांच प्रतिवेदन के अनुसार 30 अप्रैल 2026 को की गई जांच में पाया गया कि युवती अपने भाई के इलाज के लिए अस्पताल आई थी. चिकित्सक द्वारा उसके भाई को दर्द का इंजेक्शन लगाने की सलाह दी गई थी. आकस्मिक विभाग में अधिक भीड़ होने के कारण युवती ने स्वयं अपने भाई को इंजेक्शन लगा दिया. जांच के दौरान युवती ने बताया कि वह पहले से जीडीए (जनरल ड्यूटी असिस्टेंट) का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी है और इंजेक्शन देना जानती है.

हालांकि शिकायतकर्ता इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से युवती इंजेक्शन लगाती दिखाई दे रही है और उसके पास एक महिला भी खड़ी है. लेकिन वीडियो में आकस्मिक विभाग में भीड़ जैसी कोई स्थिति नजर नहीं आती. ऐसे में जांच टीम ने किस आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि उस समय अत्यधिक भीड़ थी, यह सवाल खड़ा होता है.

हरे कृष्णा सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि यदि युवती अस्पताल की कर्मचारी नहीं थी तो उसे इंजेक्शन कहां से मिला. इसके अलावा उस समय आकस्मिक विभाग के नियमित स्वास्थ्यकर्मी और अन्य स्टाफ कहां थे, इसकी भी जांच होनी चाहिए. उनका आरोप है कि जांच प्रतिवेदन वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता और कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को अनुत्तरित छोड़ देता है.

उन्होंने कहा कि मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके. साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर पूरे मामले में कार्रवाई की मांग करने की बात कही है.

फिलहाल अस्पताल प्रशासन की जांच रिपोर्ट और शिकायतकर्ता के आरोपों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. 

इस मामले में सिविल सर्जन डॉ शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती से संपर्क नहीं हो पाने की वजह से उनका पक्ष ज्ञात नहीं हो सका.

हाल ही में अस्पताल के गेट पर नवजात बच्चों का इलाज करने के मामले में चर्चा में रहे डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में यह नया मामला सामने आने के बाद अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में आगे कोई नई जांच कराता है या नहीं. 

वीडियो : 














Post a Comment

0 Comments